Monday, May 6, 2013

​चीन की कोई गलती नहीं है .....

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  हमारा पडोसी देश चीन तो आरंभ से ही चीनी है अर्थात मीठा मीठा .गलती तो हम्मे है जो आज तक उसे समझ ही नहीं पाए और उसकी मुस्कुराती आँखों से कुछ ज्यादा ही पी ली और लो हो गए मद होस .जब खुमारी टूटी तो पाया की मैखाने पे पिलाते पिलाते उसने (चीनी ने) हमारे वस्त्र उतरना सुरु कर दिया इसमें उसका कोई दोष नहीं आखिर पीना तो सुरु हमही ने क्या था .फिर क्या था देखते देखते उसने हमें खिलाना भी शुरू कर दिया .हम एक के बाद एक दाव लगाते जा रहे है पांडवो की तरह और अब देखना  है की द्रौपदी की बारी  आते तक भीम रूपी हमारे रक्षा मंत्री को गुस्सा कब आएगा की ..चीन ....तेरी ऐसी की तैसी ........ अब हम भी  बनायेंगे सीन .....पर क्या करे हमारी सरकार  है ​फुल्ली  डेमोक्रेटिक ....उसे चीन के कारण  हुए लफड़े के   साथ साथ अपनी कुर्शी भी तो बचानी है तभी तो पब्लिक और देश को अपनी टोपी पहना सकेंगे ..पर चीन के साथ ऐसी कोई समस्या नहीं है  वहाँ तो एक सरफिरा सैनिक राजा  ने जो कह दिया वाही होना है. खैर वैसे भी देखा जाये तो चीनी नटखट का काम  ही पड़ोसियों के साथ  छेड़खानी ट्राइल एंड एरर का रहा है किसी पडोसी ने गुर्राया तो  सॉरी ....कह कर अलग हो लिया ..अगर नहीं बोला  तो अंगुली से पंहुचा पकड़ लिया .पंचतंत्र के अनुसार जब किसी चूहे के पास ज्यादा धन हो 
 जाता है तो वह ज्यादा  उछलने लगता है उसका धन यदि युक्ति से कम कर दिया जाये तो उसकी उछल कूद बंद . परमाणु शक्ति संपन्न दोनों देश के पास आज ज्यादा जन बल धन हो रहा है फिर भी यदि चीन को ज्यादा गुमान है तो भारत को ज्यादा मीठा खा कर  मधुमेह बीमारी लगाने के बजाये उसे थोडी सी नीम खिलाना चाहिए और वो भी उससे व्यापारिक रिश्ते बंद करके ... वैगेरह ... वैगेरह। यदि ये मंत्र काम नहीं आया तो  दूसरा मैं बाद में बताऊंगा ......
फार्मूला नंबर २ - यदि चीन को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा तो हमारे सूलझे हुए राजनीतिज्ञ  जैसे  दिग्विजय सिंह ,सिब्बल जी ,आडवानी जी ,ममता दीदी को उन्हें और उनके रक्षा मंत्री से मीटिंग करने  बिना अंटोनी  के  भेजना चाहिए क्योकि इन सभी वक्तावो के पास हर चीज का सोलुसन है .....
फार्मूला नंबर ३  - यदि चीन को इस फार्मूला नंबर २ से कोई फर्क नहीं पड़ेगा तो  हमारी तीसरी  आँख यानि बापू  की अहिंशा की शक्ति काम आएगी .हम कुछ अहिन्षक नेता जैसे की अन्ना  जी , केजरीवाल जैसे को आमरण अनशन पर लेह लद्दाख पर बैठा सकते है जिससे की हमारे देश के कुछ जाने माने नेताओं की चीनी (शुगर ) ही कुछ कम हो सके .चीन को तो हम फार्मूला नंबर ४ से पछाड़ सकते है ........

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